The passage is extracted from the Bṛhaddeśī treatise
"BŖHADDEŚĪ
188"
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BŖHADDEŚĪ
188
उदाहरणम् - नि नि पा सा मागारीसागारीसा सा सा मा मा गा नि नि नि सा सा नि सा सा नि पापा प नी स नि सा सा नि
गागा पमममारी मा पा धा पा पामपारी म पा नि सा रिनिसासा। रविचन्द्रा । [२]
धा
मध्यमांशा तु षड्ज?ान्ता सम्पूर्ण १० प्रेङ्क्वके स्मृता ।
प्रोधकैः
११भाषा सा भिन्नपौराली गीयते सुस्वरा सदा ॥ १०॥
उदाहरणम् - मामा मध्यमामा मा मा पा मा पा नि सा सा ग्रमगा नि सा धा धा गा मा म प रि सा नि नि सा
मा ग रि सा मा ग रि सा नि पा [सा]। भिन्नपौराली।[३]
पञ्चमांशा तु षड्ज?ान्ता पूर्णा द्राविडदेशजा ।
(शा ? शजा)
गीयते नित्यमेवैषा <sup>१२</sup>परिभ्रष्टस्य मार्गणे ॥ ११॥
परिष्टस्य+
उदाहरणम् - पा नि नि धा सा सा ग रि मा ग रि सा सा नि रि नि पा पा नि सा ग रि मा स रि
सा सा सा
नि रि म धा पा पा नि नि नि धा सा सा । द्राविडी । [४]
गान्धारांशा तु षड्ज?ान्ता <sup>१३</sup>विभाषा पिञ्जरी शुभा ।
(विजरा?पिञ्जरी)
षट्स्वरा च निहीना स्याद् उमादेव्या च गीयते ॥ १२॥
निपादहीना
उदाहरणम् - गा गा गा रि सा धा सा सा रि गा गा मा गा रि सा । धा सा पा धा प गा पा धा स रि रि गा पा
मा ग रि सा मा रिसाधारीसासारि धा सा रि गा गा मा मा ग रि सा रि रि गा रि रि सा रीसापा
धा स पा
नि
सारीमापा धा पा सा रि गा मा रि रि सा । पिञ्जरी । [५]
षड्ज?ांशन्याससंयुक्ता पूर्णा पर्वतदेशजा ।
गीयते त्रपवीराणा भाषा हिन्दोलके शुभा ॥ १३॥
उदाहरणम् - सा सा नि म पा मा पा नि धा नि धा पा मा पा रीसापानिनि मा रि मा ग नि सा नि नि सा गा
पा नि सा सा नि नि पा मा पा नि मा धा नि धा पा मा मा रि मा मा पा नि सा मा गा रि सा मा गा रि सा नी सा सा सा ।
पार्वती । [६]
॥ इति शार्दूलमते हिन्दोलकभाषा समाप्ता॥
र्गलक