madhurī is a bhāṣā characterized by weak pañcama, profusion of dhaivata-niṣāda, and șadja-dhaivata pairing
"मध्यमांशा तु षड्ज?ान्ता दुर्बला पञ्चमेन तु ।
७३धैवतनिषादबाहुल्यं षड्जधैवतयोस्तथा"
BRHADDEŚĪ
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यापापाधापासासापाधापमगामामा
उदाहरणम् - सा पा पा धा मा मा पा गा म गा प धा धा पा ग मा
गा म सा सा सा गा गा मा गा मा मा । षड्ज?[मध्यमा]।[४]
मध्यमांशा तु षड्ज?ान्ता <sup>७२</sup>दुर्बला पञ्चमेन तु ।
७३धैवतनिषादबाहुल्यं षड्जधैवतयोस्तथा ॥
भाषेयं षाडवा ज?्ञेया प्रेङ्खके मधुरी भवेत् ॥ ८८॥
प्रेक्षके मधुकरी
मापानिसासारिरोगमगारीसासा
उदाहरणम् – मा पा पा धा धा मा ध नि नि पा स नि ध सा सा मा पा ध नि स नि सा सा
नि धा पा पा पा ध नि धा सासा रिरोममागरिसासा। मधुरी। [५]
मधु(क)री
॥ इति हिन्दोलके भाषा[:] समाप्ता[:] ॥
[५.अथ पञ्चमे] ७४
पञ्चमांशा तदन्ता च निषादबहुला सदा।
परस्परं तु दृश्येत अषड्जधैवतसङ्गति ॥ ८९॥
<sup>७६</sup>पूर्णा पञ्चमजा ह्येषा त्वाभीरी देशसम्भवा ।
आभौरी
पूर्ण
एषा भाषा तु विज?्ञेया प्रथमा पञ्चमोद्भवा ॥ ९०॥
उदाहरणम् -पाधामाधनिधापापापा प ध नि धा मा मा धा नि सा सा स नि ध नि स धा नि सा नि धा सा धरि-
मा मा धा नि नि धा पा पा प म म ध नि सा सा सनिनिसासासिनगरिमममागा रिसससधिनपा धा मा मा स -
रि मा धा रि म पा पा । आभीरी। [१]
भाविनी पञ्चमन्यासा गान्धारांशाल्पधैवता ।
मध्यपञ्चमयोर्यत्र गमनं दृश्यते घनम् ॥
मध्यम्
भाषा तु भाविनी ज?्ञेया पूर्णा गान्धर्ववेदिभि ७०॥ ९१॥
उदाहरणम् -गामापागमपानिधा[पा]। गमपामागागारीरीगानीधापापापाप। मा मा गा मा पा पा
मापापामाधारीसगगमापा मागारीरीपापा । भाविनी ।[२]