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[४.अथ हिन्दोलके]
भिन्दोलके++
षड्ज?ांशन्याससंयुक्ता धैवतेन च दुर्बला5 ।
षड्जगान्धारसञ्चारस्तत्र योज?्यः प्रयोक्तृभिः3॥
यो(न्य?ज?्यः)
गान्धारस्य प्रयोगेण भाषेयं स्याद्धि वेसरी
६६ ॥८३॥
तस्य
उदाहरणम्-सासागासासनिपानि। माधामागासमासासासा। स म गा स प म रि गा सा नि नि मा सा गा सा सा ।
ध नि पा पा प नि सा सा । वेसरी । [१]
गा
६७पञ्चमांशर्षभहीना षड्ज?ान्ता षाडवा भवेत्4 ।
॰मांशा ऋषभ॰
षड्जपञ्चमसंवादो द्विश्रुतीना तथैव च ॥
भाषा हिन्दोलके ह्येषा कथिता प्रथममञ्जरी7६८ ॥८४॥
उदाहरणम् – पा पा पा पा ध म पा नी सा पञ्चमपाधनि धा सा सा पा पा नि सा सा सा गा सा पा गा मा नि स नि पापा
निसा गा नि सा नि सा सा । प्रथममञ्जरी । [२]
षड्ज?ांशन्याससंयुक्ता ६९सम्पूर्णा धेन दुर्बला ।
संवादश्चेव कर्तव्यः षड्जमध्यमयोस्तथा
10 ॥
षड्जगान्धारयोर्नित्यं छेवाटी सम्प्रकीर्तिता
७० ॥८५॥
चेवाटी
उदाहरणम् - सा पा सा । मा गा सा सा गा म नि मा पा मा सा सा मा मा नी मा मा नी मा मा नी मा मा पा पा गा मा सासा
सा गा सा नी । सा गा सा नी स नि धा म धा मा पा पा पा धा मा मा ध म प म ग रि सा सानीनीनीसागारी मामारीनीसासा।
छेवाटी।[३]
न्दी
षड्ज?ांशा मध्यमान्ता च निषादर्षभदुर्बला ।
षड्जमध्यमसंवादस्तथा
गान्धारपञ्चमे ॥८६॥
एषा भाषा तु कथिता किन्नरैरिप गीयते1 ॥८७॥